वृंदावन चलो रे मनवा।। Vrindavan Chalo Manava
वृंदावन चलो रे मनवा, राधे-राधे गाते चलो,
कृष्ण-कन्हैया के चरणों में, अपना शीश झुकाते चलो॥
कुंज-गलिन में रास रचाते, राधा संग बनवारी,
धन्य हुई वह धरा जहाँ पर, लीला की उजियारी।
प्रेम की गंगा बहती देखो, मन को नहलाते चलो,
वृंदावन चलो रे मनवा, राधे-राधे गाते चलो॥
बांके बिहारी के दर्शन से, दुख की रात ढलेगी,
जिसके मन में नाम बसेगा, उसकी नैया चलेगी।
लोभ-मोह की गठरी छोड़ो, हरि-गुण गाते चलो,
वृंदावन चलो रे मनवा, राधे-राधे गाते चलो॥
न धन-दौलत, न जग की शोभा, हमको कुछ न भाए,
राधा-कृष्ण की भक्ति से बढ़कर, कोई सुख न पाए।
मन की मैल उतार के साथी, प्रेम लुटाते चलो,
वृंदावन चलो रे मनवा, राधे-राधे गाते चलो॥
क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

