कान्हा तेरी बाँसुरिया।। Kanha Teri Basuriya
कान्हा तेरी बाँसुरिया, मन को बहुत भाए रे,
सुनते ही इसके मीठे सुर, सुध-बुध भूल जाए रे॥
यमुना तट पर कदंब की डाली, मंद-मंद मुसकाए,
ग्वाल-बाल संग खेलत कान्हा, धूलि चरण लग जाए।
गोकुल की हर गली में देखो, प्रेम-दीप जलाए रे,
कान्हा तेरी बाँसुरिया, मन को बहुत भाए रे॥
मैया यशोदा ढूँढ़ रही है, लाला कहाँ छिपाया,
माखन की मटकी फोड़-फोड़ कर, किसने घर महकाया?
भोले मुख पर माखन शोभे, जग को रस बरसाए रे,
कान्हा तेरी बाँसुरिया, मन को बहुत भाए रे॥
मेरे मन की सूनी बगिया, तेरे बिन मुरझाई,
एक बार तू आ जा मोहन, जीवन में हो रुनझुनाई।
तेरे नाम का जप कर-कर के, यह मन तुझको ध्याए रे,
कान्हा तेरी बाँसुरिया, मन को बहुत भाए रे॥
क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

