हृदय का मन्दिर।। Hridaya Ka Mandir

Swami Ji Maharaj
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 हृदय का मन्दिर।। Hridaya Ka Mandir.

भूमिका:- सच्चा भक्ति-भाव बाह्य आडंबर में नहीं, अपितु हृदय के मन्दिर में प्रकट होता है। जब मन कृष्णमय हो जाता है, तभी जीवन सार्थक प्रतीत होता है। इस रचना में अंतःकरण के उसी मन्दिर का भाव व्यक्त हुआ है। हृदय को कृष्णमय मन्दिर मानकर रची गई यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी भक्ति, समर्पण और पवित्रता का सुंदर स्वरूप है।।

शायरी:-

हृदय का मन्दिर।। Hridaya Ka Mandir

मेरे हृदय का मन्दिर केवल, कृष्ण-प्रतिमा से सज जाए।।
हर श्वास में उनका नाम रहे, हर भाव उन्हीं में रम जाए।।


न कोई चाह, न कोई तृष्णा, न संसारिक अभिलाषा हो।।
बस श्रीकृष्ण के चरणों में ही, जीवन की परिभाषा हो।।


अंतःकरण जब पवित्र बने, तब प्रभु स्वयं मिल जाते हैं।।
भक्ति के निर्मल पथ पर वे, अपने प्रेम से भर जाते हैं।।

हृदय का मन्दिर।। Hridaya Ka Mandir

मेरे जीवन की हर एक बेला, तेरे ही गुण गान करे।।

हे माधव, मेरा मन निरंतर, तुझको ही प्रणाम करे।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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