गोकुल का उजियारा।। Gokul Ka Ujiyara.
भूमिका:- गोकुल श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और दिव्य मुस्कान से आलोकित वह पावन भूमि है, जहाँ प्रेम, सरलता और माधुर्य का अद्भुत संगम दिखाई देता है। इस रचना में गोकुल की उसी दिव्यता का स्मरण है। गोकुल, बालकृष्ण और उनकी दिव्य लीलाओं पर आधारित यह शायरी-लेख भक्तिभाव, माधुर्य और आनंद से परिपूर्ण है।।
शायरी:-
गोकुल का हर कण-पल आज भी, कृष्ण-स्मृति से महकता है।।
वहाँ का वायु-प्रवाह भी, मानो मधुर गीत सा बहता है।।
बाल-गोपाल की हँसी में ही, सारा जगत समाया है।।
उनकी नटखट लीला ने ही, भक्तों का मन हरषाया है।।
गोकुल की पावन धरती पर, प्रेम स्वयं अवतरित हुआ।।
वहाँ का हर एक वृक्ष-वल्लरी, भक्ति-रस से आप्लुत हुआ।।

जिसने गोकुल का स्मरण किया, उसका अंतःकरण खिल जाता।।
श्रीकृष्ण के बाल-रूप का दर्शन, मन को नित पुलकाता।।
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कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
