अनंत चतुर्दशी व्रत कथा।। Anant Chaturdashi Vrat Katha

Swami Ji Maharaj
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अनंत चतुर्दशी व्रत कथा।। Anant Chaturdashi Vrat Katha.

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा।। Anant Chaturdashi Vrat Katha

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। और यह व्रत भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है। इसी नाम के कारण इसे अनंत व्रत भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करके चौदह गांठों वाला पवित्र अनंत सूत्र धारण किया जाता है। जिसे रक्षा-सूत्र के रूप में हाथ में बांधा जाता है। मान्यता है कि यह सूत्र जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करके सुख-समृद्धि तथा अनंत आशीर्वाद प्रदान करता है।।

अनंत चतुर्दशी का एक और बड़ा महत्व यह भी है, कि गणेश चतुर्थी से आरंभ होने वाला दस दिवसीय गणेशोत्सव इसी तिथि को संपन्न होता है। इसी दिन घरों तथा पंडालों में विराजमान गणपति बप्पा की प्रतिमाओं का भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन किया जाता है। इस प्रकार यह दिन एक साथ दो महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं का संगम बन जाता है। भगवान श्रीविष्णु की पूजा तथा गणेश-विसर्जन, दोनों का संयुक्त उत्सव।।

मित्रों, पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि पांडवों को जुए में सब कुछ गंवाने तथा वनवास भोगने के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने ही युधिष्ठिर को यह अनंत व्रत करने की सलाह दी थी। जिसके प्रभाव से पांडवों को पुनः उनका खोया हुआ राज्य तथा वैभव प्राप्त हुआ। इसी कारण इस व्रत को खोई हुई समृद्धि पुनः प्राप्त करने तथा संकटों से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।।

आज हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे आपका भी डूबा हुआ पैसा भी इस व्रत के प्रभाव से पुनः प्राप्त हो सकता है। और यह भी जानेंगे की इसवर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का पावन व्रत कब मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, व्रत तथा अनंत सूत्र की पूजा-विधि किस प्रकार संपन्न की जाती है। तथा इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा।। Anant Chaturdashi Vrat Katha

वर्ष 2026 में तिथि एवं मुहूर्त।। Date and Muhurat in 2026.

मित्रों, पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का पावन व्रत शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 24 सितंबर 2026 की रात्रि लगभग 11:18 PM बजे होगा। तथा इसका समापन 25 सितंबर 2026 की रात्रि लगभग 11:06 PM बजे होगा। चूँकि कोई भी व्रत सदैव उदयातिथि के अनुसार ही रखा जाता है। इसलिए यह व्रत 25 सितंबर को ही रखा जाना शास्त्रसम्मत माना गया है।।

पूजा हेतु इस दिन अभिजीत मुहूर्त प्रातः लगभग 11:48 AM बजे से दोपहर 12:37 PM बजे तक रहेगा। जो पूजा के लिए भी विशेष रूप से शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र तथा रवि योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं। जो इस पर्व की महत्ता को और अधिक बढ़ा देते हैं। सूर्योदय का समय लगभग प्रातः 6:10 बजे तथा सूर्यास्त का समय लगभग संध्या 6:15 बजे रहेगा।।

मित्रों, यहाँ यह भी बता दूँ कि इन समयों में स्थान-विशेष के पंचांग के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग अथवा स्थानीय पुरोहित से एक बार अवश्य पुष्टि कर लें। इसी दिन अनेक स्थानों पर गणेश विसर्जन की भव्य शोभायात्राएं भी निकाली जाएंगी। इसलिए पूजा का समय निर्धारित करते समय स्थानीय व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखना उचित रहेगा।।

व्रत एवं पूजा की संपूर्ण विधि।। Complete Vrat and Puja Vidhi.

मित्रों, अनंत चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तथा पूजा-स्थान को अच्छी तरह साफ-सफाई करके स्वच्छ करें और वहाँ भगवान श्रीविष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। एक कलश में जल भरकर उसके ऊपर कुशा से बना अनंत रूप अर्थात शेषनाग की आकृति स्थापित करें। तथा साथ ही चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र भी पूजा में अवश्य रखें।।

भगवान श्रीविष्णु को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य अर्पित करके विधिवत पूजा करें। तथा "ॐ अनंताय नमः" अथवा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इस मंत्र का जप करते हुए अनंत व्रत की कथा का श्रवण करें। पूजा के पश्चात अनंत सूत्र को भगवान के समक्ष रखकर पूजित करें। फिर इसे पुरुष अपने दाहिने हाथ में तथा स्त्रियाँ अपने बाएं हाथ में बांधें। यह अनन्त सूत्र वर्षभर धारण करने का विधान बताया गया है। तथा अगले वर्ष के अनंत चतुर्दशी पर इसे बदला जाता है।।

इस दिन दिनभर निराहार अथवा फलाहार व्रत रखते हुए मन को धार्मिक कार्यों में लगाना चाहिए। तथा व्यर्थ की बातों एवं काम-क्रोधादि से बचकर रहना चाहिए। संध्याकाल में भगवान विष्णु की आरती करें। तथा जिन घरों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है। वहाँ इसी दिन शुभ मुहूर्त देखकर गणपति बप्पा का भाव पूर्वक विसर्जन भी किया जाना चाहिए। व्रत के अगले दिन यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन तथा दान करके व्रत का समापन करना चाहिए।।

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक कथा।। The Legendary Story of Anant Chaturdashi.

मित्रों, इस व्रत से जुड़ी एक अत्यंत प्रसिद्ध कथा कौंडिन्य ऋषि तथा उनकी पत्नी सुशीला की है। कथा के अनुसार सुशीला ने एक स्त्री की प्रेरणा से अनंत व्रत करना आरंभ किया। तथा अपनी कलाई पर अनंत सूत्र बांध लिया। इस व्रत के प्रभाव से उनका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया। परन्तु एक दिन कौंडिन्य ऋषि ने अज्ञानतावश उस सूत्र को तोड़कर अग्नि में डाल दिया था। जिसके पश्चात उनके घर में पुनः दरिद्रता आ गई।।

अपनी इस भूल का एहसास होने पर कौंडिन्य ऋषि भगवान अनंत अर्थात विष्णु जी को खोजने वन की ओर निकल पड़े। मार्ग में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तथा अंततः भगवान विष्णु ने स्वयं वृद्ध ब्राह्मण के रूप में प्रकट होकर उन्हें अनंत व्रत की महिमा तथा सही विधि समझाई। भगवान के आशीर्वाद से कौंडिन्य ऋषि पुनः घर लौटे। तथा श्रद्धापूर्वक विधिवत अनंत व्रत करने पर उनके घर में पुनः सुख-समृद्धि लौट आई।।

इस कथा से यह भी प्रमाणित होता है, कि आपका खोया धन-प्रतिष्ठा सबकुछ आपको सहज ही प्राप्त हो जाता है। और इसी के आधार पर यह मान्यता भी प्रचलित हुई कि जो भी जातक श्रद्धापूर्वक अनंत चतुर्दशी का व्रत करता है। तथा चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का सम्मान करता है। उसे भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। तथा जीवन की समस्त बाधाएं दूर होकर अंततः अनंत सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, अनंत चतुर्दशी व्रत हमें यह सुंदर संदेश देता है कि श्रद्धा तथा समर्पण के साथ किया गया छोटा-सा संकल्प भी जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकता है। कौंडिन्य ऋषि की कथा हमें यह सिखाती है कि किसी भी पवित्र परंपरा अथवा प्रतीक का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। तथा भगवान की कृपा सदैव सच्ची श्रद्धा रखने वालों पर ही बरसती है।।

जो श्रद्धालु इस पावन तिथि को व्रत, पूजा तथा अनंत सूत्र धारण के माध्यम से मनाते हैं। वे न केवल धार्मिक पुण्य अर्जित करते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी नई ऊर्जा, स्थिरता तथा सकारात्मकता का अनुभव करते हैं। इसलिए इस वर्ष 25 सितंबर दिन शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक इस व्रत को अवश्य करें। तथा परिवार सहित भगवान श्रीविष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।।

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नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।
 
 
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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