भक्ति का आलोक।। Bhakti Ka Alok

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 भक्ति का आलोक।। Bhakti Ka Alok.

भूमिका:- भक्ति वह दिव्य धारा है, जो मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध, शांत और प्रकाशित कर देती है। श्रीकृष्ण-भक्ति में डूबा हृदय संसार के दुःखों से ऊपर उठकर परम शांति का अनुभव करता है। इस रचना में उसी भक्ति-प्रकाश का मधुर चित्रण प्रस्तुत है। श्रीकृष्ण-भक्ति, शरणागति और आत्मिक आलोक पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी पाठकों को गहन श्रद्धा से भर देता है।।

शायरी:-

Bhakti Ka Alok

जब भक्ति का रंग चढ़ जाए, तब जग सूना-सा लगता है।।
कृष्ण-नाम की महिमा से ही, हर अंतर आलोकित रहता है।।

तेरे श्रीचरणों में जो झुकता, उसका मन निर्मल हो जाता।।
कान्हा का अनुग्रह पाकर वह, प्रेम-सिंधु में खो जाता।।

हर संकट में तू ही सहारा, हर वेदना का तू उपशमन।।
कृष्ण-नाम के आश्रय से ही, मिलता जीवन को नव-जीवन।।
Bhakti Ka Alok
मेरे अंतर के मन्दिर में, बस तेरी ही प्रतिमा रहे।।
जब तक श्वास प्रवाहित हो, तेरी ही भक्ति-धारा बहे।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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