अहिंसा, सम्यक ज्ञान और भगवान बुद्ध ।। Ahinsa, SamyakGyan and BhagwanBuddha.

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जय श्रीमन्नारायण,
 
 
मित्रों, भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश किया । उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग बताया ।।

भगवान बुद्ध भगवान नारायण के अवतार माने जाते हैं एवं पाखण्ड का खण्डन करने के लिए अवतरित हुए थे । उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है ।

उन्होंने ध्यान और साधना के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया तथा यज्ञ में पशु-बलि आदि की निंदा की । बुद्ध के उपदेशों का सार इस प्रकार है ।।

सम्यक ज्ञान - बुद्ध के अनुसार धम्म क्या है ?

जीवन की पवित्रता को बनाए रखना धम्म है । जीवन में पूर्णता प्राप्त करना धम्म है । निर्वाण प्राप्त करना धम्म है । तृष्णा का त्याग करना धम्म है । संसार के सभी संस्कार अनित्य हैं, इस बात को मानना धम्म है । कर्म को मानव के नैतिक संस्थान का आधार मानना धम्म है ।

सम्यक ज्ञान - बुद्ध के अनुसार अ-धम्म क्या है ?

परा-प्रकृति में विश्वास करना अ-धम्म  है । आत्मा में विश्वास करना अ-धम्म  है । कल्पना-आधारित विश्वास मानना अ-धम्म  है । धर्म की पुस्तकों का वाचन मात्र अ-धम्म  है ।

सम्यक ज्ञान - बुद्ध के अनुसार सद्धम्म क्या है ?

1.जो धम्म प्रज्ञा की वृद्धि करे वो सद्धम्म है । जो धम्म सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे वही सद्धम्म है । जो धम्म यह बताये कि केवल विद्वान होना पर्याप्त नहीं है वो सद्धम्म है । जो धम्म यह बताये कि आवश्यकता प्रज्ञा प्राप्त करने की है वो सद्धम्म है ।

2.जो धम्म मैत्री की वृद्धि करे वो सद्धम्म है । जो धम्म यह बताए कि प्रज्ञा भी पर्याप्त नहीं है, इसके साथ शील भी अनिवार्य है वो सद्धम्म है । जो धम्म यह बताए कि प्रज्ञा और शील के साथ-साथ करुणा का होना भी अनिवार्य है वो सद्धम्म है । जो धम्म यह बताये कि करुणा से भी अधिक मैत्री की आवश्यकता है वो सद्धम्म है ।।

3.जब वह सभी प्रकार के सामाजिक भेदभावों को मिटा दे सद्धम्म है । जब वह आदमी और आदमी के बीच की सभी दीवारों को गिरा दे वो सद्धम्म है । जब वह बताये कि आदमी का मूल्यांकन जन्म से नहीं कर्म से किया जाए वो सद्धम्म है । जब वह आदमी-आदमी के बीच समानता के भाव की वृद्धि करे वो सद्धम्म है ।।

“बुद्धं शरणं गच्‍छामि, धम्मं शरणं गच्‍छामि, संघं शरणं गच्‍छामि।”

।। नारायण सभी का कल्याण करें ।।

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।। नमों नारायण ।।
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