"सर्वतीर्थमयी माता... सर्वदेवमयो पिता"!! Mata Pita Sarvashreshtha.

Swami Shri Dhananjay ji Maharaj.
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जय श्रीमन्नारायण,

"सर्वतीर्थमयी माता... सर्वदेवमयो पिता"

एक बार भगवान शंकर के यहाँ उनके दोनों पुत्रों में होड़ लगी कि, कौन बड़ा ?


निर्णय लेने के लिए दोनों गये शिव-पार्वती के पास ! शिव-पार्वती ने कहाः जो संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले पहुँचेगा, उसी का बड़प्पन माना जाएगा !!

कार्तिकेय तुरन्त अपने वाहन मयूर पर निकल गये पृथ्वी की परिक्रमा करने ! अब गणेश जी बेचारे सोंचने लगे, और चुपके-से एकांत में चले गये ! थोड़ी देर शांत होकर उपाय खोजा तो झट से उन्हें उपाय मिल गया ! जो निष्ठावान और कर्मयोगी होता हैं उन्हें अंतर्यामी परमात्मा सत्प्रेरणा देते हैं !!


अतः किसी कठिनाई के समय घबराना नहीं चाहिए, बल्कि भगवान का स्मरण करना चाहिए और थोड़ी देर शांत बैठना चाहिए ! इससे आपको जल्द ही किसी भी समस्या का समाधान मिल जाता है !!


फिर गणपति जी आये शिव-पार्वती के पास ! माता-पिता का हाथ पकड़ कर दोनों को ऊँचे आसन पर बिठाया, पत्र-पुष्प से उनके श्रीचरणों की पूजा की और प्रदक्षिणा करने लगे ! एक चक्कर पूरा हुआ तो प्रणाम किया.... दूसरा चक्कर लगाकर प्रणाम किया.... इस प्रकार माता-पिता की सात प्रदक्षिणा कर ली !!

शिव-पार्वती ने पूछाः वत्स ! ये प्रदक्षिणाएँ क्यों की ?

गणपति गजानन महाराज को याद आया, कि सर्वतीर्थमयी माता... सर्वदेवमयो पिता ! सारी पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो पुण्य होता है, वही पुण्य माता की प्रदक्षिणा करने से हो जाता है, यह शास्त्रवचन है ! पिता का पूजन करने से सब देवताओं का पूजन हो जाता है !!


फिर क्या था, गणपति महाराज बोले - माता सभी तीर्थों के समान हैं, और पिता देवस्वरूप हैं, अतः आप दोनों कि परिक्रमा करके मैंने संपूर्ण पृथ्वी की सात परिक्रमाएँ कर लीं हैं !!


महादेव और महादेवी गणेश जी कि इस बुद्धिमता से अत्यंत प्रशन्न हुए, और तब से गणपति जी प्रथम पूज्य हो गये !!

Sevashram Sansthan, Silvassa.
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प्रेम से बोलिए गणपति गजानंद महाराज कि -- जय ! जय हो गणपति महाराज, गणपति बाप्पा मोरया !!!

!!! नमों नारायण !!!!
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1 टिप्पणियाँ

  1. अति सुंदर लेख ऐसे ही कुछ अन्य माँ के लिए चुनिंदा सब्दों के लिए देखिये हमारी दी हुई लिंक पर Lines For Mother

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