धर्म तथा धार्मिक मनुष्य के दस लक्षण !!

धर्म तथा धार्मिक मनुष्य के दस लक्षण !! Dharm and dharmik manushya ke das lakshan नमों नारायणाय, मनुस्मृति में धर्म के

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् ।।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् ।।  Ashtlaxhmi Stotram जय श्रीमन्नारायण,    आदिलक्ष्मी – सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये ।। मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि, मञ्जुळभाषिणि वेदनुते

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श्री कनकधारा स्तोत्रम् – अर्थ सहितम् ।।

श्री कनकधारा स्तोत्रम् – अर्थ सहितम् ।। Shri kanakdhara stotram एक बार भारत में बीहड़ आकाल पड़ने पर परमादरणीय आदिगुरू शंकराचार्य

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श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् ।।

श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् ।।  अस्य श्रीविष्णोर्दिव्यसहस्रनामस्तोत्रस्य भगवान् वेदव्यास ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीकृष्ण: परमात्मा देवता, अमृतां-शूद्भवो भानुरिति बीजम्, देवकीनन्दन: स्रष्टेति शक्ति:, त्रिसामासामग: सामेति

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अध्यात्मरामायणमाहात्म्यम् ब्रह्माण्डपुराणे ॥

अध्यात्मरामायणमाहात्म्यम् ब्रह्माण्डपुराणे ॥ Adhyatma Ramayana Mahatmyam रामं विश्वमयं वन्दे रामं वन्दे रघूद्वहम् । रामं विप्रवरं वन्दे रामं श्यामाग्रजं भजे ॥ यस्य

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चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका ॥

चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका ॥ Chaturvimshatinama Pratipadaka Churnika ॥ श्री भद्राचल रामदास कृत चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका ॥ श्रीमदखिलाण्ड कोटि ब्रह्माण्ड भाण्ड

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भरताग्रजाष्टकम् ॥

भरताग्रजाष्टकम् ॥ Bharatagraja shtakam हे जानकीश वरसायकचापधारिन् हे विश्वनाथ रघुनायक देव-देव। हे राजराज जनपालक धर्मपाल त्रयस्व नाथ भरताग्रज दीनबन्धो॥१॥ हे सर्ववित्

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श्रीरघुनाथाष्टकम् ।।

श्रीरघुनाथाष्टकम् ॥ Shriraghunath Ashtakam श्री गणेशाय नमः । शुनासीराधीशैरवनितलज्ञप्तीडितगुणं प्रकृत्याऽजं जातं तपनकुलचण्डांशुमपरम् । सिते वृद्धिं ताराधिपतिमिव यन्तं निजगृहे ससीतं सानन्दं प्रणत

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अथ श्री राघवाष्टकम् ।।

अथ श्री राघवाष्टकम् ।। Shri Raghava Ashtakam राघवं करुणाकरं मुनि-सेवितं सुर-वन्दितं जानकीवदनारविन्द-दिवाकरं गुणभाजनम् । वालिसूनु-हितैषिणं हनुमत्प्रियं कमलेक्षणं यातुधान-भयंकरं प्रणमामि राघवकुञ्जरम्

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श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् ।।

श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् ।। Shri Krishna Dvadasha Nama Stotram   श्रीकृष्ण उवाच । किं ते नामसहस्रेण विज्ञातेन तवाऽर्जुन । तानि नामानि विज्ञाय नरः

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