राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति कैसे ?।।

राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति कैसे ?।। Rajnitaitik Duschkra me vedic sanskriti

जय श्रीमन्नारायण,

राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति, कैसे ?

मित्रों, हमने सुना है, कि नेपाल की ९०% अर्थव्यवस्था सिर्फ एक पशुपतिनाथ मन्दिर से चलती है । कितना सच है ये मालूम नहीं । तमिलनाडु की ९०% आबादी मंदिरों पर निर्भर है और मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था का आधार भी तमिलनाडु के मन्दिर ही है ।।

इतना ही क्या सम्पूर्ण भारत की आधी अर्थव्यवस्था का आधार भी मन्दिर ही है । वो भी ऐसी स्थिति में जबकि हमारे मंदिरों के प्रति हमारे राजनेताओं की नीयत जगजाहिर है ।।

अगर हमारे देश के राजनेता चाहें तो भारत का हर एक गाँव पर्यटन स्थल बन सकता है । सम्पूर्ण संसार के आकर्षण का केन्द्र बन सकता है, जिससे १००% आबादी अपनी जीविका के लिए स्वाबलंबी हो सकती है ।।

हमारे यहाँ राधा-कृष्ण के जो वस्त्र बनते हैं, उसे बनाने वालों में सबसे ज्यादा मुसलमान हैं, जिनकी जीविका भगवान के वस्त्र बनाने से चलती है । अब अगर ऐसी स्थिति में कोई मंदिरों का विरोध करे तो कुछ समझ में नहीं आता । हमारे देश के नेताओं ने वोट बैंक की राजनीति में देश की संस्कृति के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को डूबा दिया है ।।

धर्म केवल सम्प्रदायवाद ही नहीं, अपितु धर्म सम्पूर्ण समाज को जोड़ने से लेकर सम्पूर्ण समाज को सुरक्षित रखने के लिए भी बनाया जाता है । सामाजिक शान्ति से लेकर आपसी भाईचारा धर्म का प्रमुख उद्देश्य है ।।

अत: मेरे ख्याल से धर्म का पालन किसी भी परिस्थिति में सभी के लिए आवश्यक है । नारायण सभी का कल्याण करें ।।

।। नारायण सभी का नित्य कल्याण करें ।।

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जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम् ।।

।। नमों नारायण ।।

Swami Dhananjay Maharaj

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