हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम ।।

हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम ।। Hansate Huye Jakhmon Ko Bhulane lage Hain Ham

 

जय श्रीमन्नारायण,
     प्यारे कन्हैया, प्यारे कान्हा जी !

            मैं तुम्हें इतने प्यार से बुलाता हूँ, कभी भूलकर ही सही “आ भी जाओ प्यारे” ।।

 

हम अपने ज़ख्मों को हँसते हुए भुलाने लगे हैं ।
हर दर्द के अपने निशान को अब मिटाने लगे हैं ।।
अब और कोई क्या सताएगा हमें भला प्यारे ।
ज़ुल्मों सितम को तो अब हम स्वयं सताने लगे हैं ।। 

 

अपने दर्द हमने संभाला है, हमने आँसू बहाए हैं ।
बेशक वजह तुम थे प्यारे, पर दिल तो हमारा था ।।

Mere Pyare Kanhaiya Ji

यह भी एक ज़माना देख लिया है हम ने ।
​दर्द जो सुनाया अपना तो तालियां बज उठीं​ ।।

मंजिलों से बेगाना आज भी सफ़र मेरा ।
है रात बेशहर मेरी, दर्द बेअसर मेरा ।।

प्यारे, मेरे इस दर्द का यकीं आप करें या ना करें ।
कन्हैया जी, निवेदन है, कि इस राज़ की चर्चा ना करें ।।

swami ji maharaj

क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

Swami Dhananjay Maharaj

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